जयपुर. निगम की स्वास्थ्य शाखा ने घर घर जाकर दवाइयों का छिड़काव कर रहे अपने ही कर्मचारियों की स्क्रीनिंग नहीं करवाई। पिछले दिनों एसएमएस कैंटीन में एक कर्मचारी के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद चेती निगम की मलेरिया शाखा ने परकोटे से आने वाले कर्मचारियों को घरों पर ही रहने की हिदायत दे डाली। ऐसे करीब 40 कर्मचारी परकोटे के विभिन्न एरिया में रहते हैं। इनमें से 18 तो रामगंज के ही हैं। यह लोग रोजाना निगम भी आते थे और घरों घरों में दवाइयों का छिड़काव भी करते थे। चौंकाने वाली बात यह कि मलेरिया शाखा के इंचार्ज को 4 दिन पहले तेज बुखार हुआ उसके बाद उन्हें एडमिट करवाया गया इसके बावजूद भी निगम में कार्यरत डॉक्टर्स की टीम ने कर्मचारियों का स्क्रीनिंग व अन्य टेस्ट नहीं करवाया। यही नहीं इनके पास सेफ्टी किट भी उपलब्ध नहीं है और ना सैनिटाइजर व ग्लवस पर्याप्त मात्रा में दिए गए हैं।
करीब 110 सदस्य ही मलेरिया टीम के कर्मचारी ही घर घर जाकर फागिंग फिनिश्ड और अन्य दवाइयों का छिड़काव कर रहे है। गौरतलब है कि नगर निगम में दो मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों सहित कुल 4 डॉक्टर्स की टीम है जिनका मूल काम ही मलेरिया शाखा और स्वास्थ्य शाखा में कार्यरत कर्मचारियों की नियमित जांच करना है।
उपायुक्त स्वास्थ्य देवेन्द्र कुमार जैन का कहना है कि परकोटे में उपजे हालात को देखते हुए हाल फिलहाल वहां से आने वाले कर्मचारियों को मना कर दिया गया है। उनके स्वास्थ्य से संबंधित जांच दो अभी तक नहीं करवाई लेकिन अब करवाएंगे। मलेरिया शाखा की प्रभारी डॉ. सोनिया अग्रवाल का कहना है कि कार्य की अधिकता के चलते मलेरिया में लगे कर्मचारियों की स्क्रीनिंग व अन्य टेस्ट नहीं करवाए गए, वह जल्द ही करवाए जाएंगे मलेरिया टीम के इंचार्ज युसूफ जी की तबीयत बिगड़ी थी तो उन्हें घर भेज दिया गया था अभी ठीक है।
कोरोना के लक्षण दिखने पर भी जांच नहीं करवाने पर होगी कड़ी कार्रवाई
जयपुर। कोरोना संक्रमण रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। कलेक्टर की ओर से जारी आदेश के अनुसरा, कोरोना के लक्षण दिखने के बाद भी जांच नहीं करवाने लोगों, झूठी अफवाह फैलाने वालों, क्वेरेंटाइन सेंटरों से भागने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई के लिए जिला एवं उपखण्ड स्तर पर समितियां भी बनाई गई हैं। यह कार्रवाई ‘द राजस्थान एपिडेमिक डिजीज एक्ट, 1957’, ‘ द डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005’ के तहत की जाएगी। इसके अलावा ऐसे व्यक्ति जो किसी कोरोना वायरस पॉजिटिव पीडि़त के सम्पर्क में आने के बावजूद अपना स्वास्थ्य परीक्षण नहीं करवा रहा और होम आइसोलेशन में नहीं हैं, उनके खिलाफ भी सख्त कार्यवाही होगी।
क्वेरेंटाइन सेंटर से भागे तो तत्काल पुलिस मुकदमा दर्ज हो सकता है
जिला मुख्यालय पर बनाए विभिन्न क्वेरेंटाइन सेन्टर से कोई भागने का प्रयास करता है तो उस पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते है। यही नहीं सेंटर या अस्पताल या स्क्रीनिंग के दौरान भी अगर कोई व्यक्ति मेडीकल टीम या पुलिसकर्मी के समक्ष कार्य में बाधा उत्पन्न करता है तो उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। अगर कोई व्यक्ति कोरोना वायरस के संक्रमण के संदर्भ में किसी भी प्रकार की गलत सूचना या अफवाह फैलाता है या सरकारी सहायता फर्जी तरीके से प्राप्त करता है तो खैर नहीं। कुछ लोग सम्पन्न लोग भी फर्जी तरीके से कॉलसेंटर या अन्य माध्यम से सरकार से राशन व अन्य सामाग्री की मांग कर रहे हैं।